दो बार BJP से सांसद रहे ये नेता अब सपा में हो गए शामिल, यूपी MLC के नतीजे वाले दिन भाजपा को झटका

लखनऊ में मंगलवार को समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में भाजपा के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप और उनकी बेटी कीर्ति कश्यप ने पार्टी की सदस्यता ली. धर्मेंद्र कश्यप ने बीजेपी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर जाति के आधार पर कार्रवाई करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि बीजेपी में जाति देखकर एनकाउंटर किए जा रहे हैं और जनता परेशान है.

सपा में शामिल होने वाले नेताओं में तेज प्रताप सिंह, रंजीत गिरी गोस्वामी, साहू राठौर महासभा से जुड़े अमन साहू और बरेली के डॉक्टर प्रमोद विश्वकर्मा समेत अन्य लोग भी शामिल रहे. पार्टी ने इन नेताओं के आने को 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर पेश किया.

धर्मेंद्र कश्यप ने कहा कि वह बरेली मंडल ही नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उन इलाकों में भी जाएंगे जहां कश्यप और निषाद समाज के लोग रहते हैं. उन्होंने कहा कि वह लोगों से मिलकर सपा को मजबूत करने का काम करेंगे. ये सभी नेता ऐसे समय में सपा में शामिल हुए हैं जब यूपी एमएलसी चुनाव की वोटिंग की गिनती चालू है. 

शिवपाल यादव बोले- 2027 में बदलाव होकर रहेगा

सपा के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने धर्मेंद्र कश्यप का स्वागत करते हुए कहा कि वह दो बार सांसद रह चुके हैं और मुलायम सिंह यादव की सरकार में मंत्री भी रहे हैं. शिवपाल ने कहा कि धर्मेंद्र कश्यप के साथ उन्होंने पहले भी काम किया है और उस समय भी वह उनके भरोसेमंद साथी रहे थे. उनकी बेटी कीर्ति कश्यप भी अब सपा के साथ हैं.

शिवपाल यादव ने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होगा. उन्होंने कहा कि कश्यप, निषाद समेत अलग-अलग वर्गों के लोग सपा से जुड़ रहे हैं. उनके मुताबिक, अखिलेश यादव ही इन वर्गों को सामाजिक न्याय की उम्मीद दिला सकते हैं.

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में दूसरे दलों के नेता भी सपा में शामिल होंगे. पार्टी में आने वाले नेताओं को राजनीतिक सम्मान और आगे बढ़ने का मौका देने का भरोसा भी दिया. शिवपाल ने कहा कि सपा को उन दलों और नेताओं से भी सावधान रहना होगा, जिनके बारे में उनका आरोप है कि वे किसी दूसरे दल के इशारे पर काम करते हैं.

धर्मेंद्र कश्यप कौन हैं?

धर्मेंद्र कश्यप बरेली जिले के रहने वाले हैं. 2014 और 2019 में बीजेपी के टिकट पर आंवला लोकसभा सीट से सांसद चुने गए थे. 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें सपा के नीरज मौर्य से हार का सामना करना पड़ा था.

 

उनका राजनीतिक सफर पहले बसपा और फिर सपा से शुरू हुआ था. वर्ष 2002 में वह पहली बार विधायक बने. 2007 में सपा के टिकट पर दोबारा विधानसभा पहुंचे और मुलायम सिंह यादव की सरकार में राज्य मंत्री रहे. मई 2013 में वह बीजेपी में शामिल हो गए थे.

 

अक्टूबर 2026 में बीजेपी की राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची में नाम नहीं आने के बाद उनके पार्टी छोड़ने की अटकलें तेज हुई थीं. 6 अक्टूबर को उन्होंने फेसबुक पर सूर्यास्त की तस्वीर के साथ ‘टाटा बाय-बाय’ लिखा. इस पोस्ट को बीजेपी नेतृत्व से उनकी नाराजगी और पार्टी छोड़ने के संकेत के तौर पर देखा गया.

 

बाद में उन्होंने अखिलेश यादव से मुलाकात की और अब सपा की सदस्यता ग्रहण कर ली है. उनकी वापसी से बरेली और रुहेलखंड क्षेत्र में सपा को कश्यप समाज के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने का मौका मिल सकता है, हालांकि इसका चुनावी असर अभी तय नहीं है.

 

MLC चुनाव में वोटों को लेकर बीजेपी पर आरोप

अखिलेश यादव ने विधान परिषद (MLC) चुनाव में वोटों की गिनती और मतदान प्रक्रिया को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा. उन्होंने कांति सिंह से जुड़े मामले का जिक्र करते हुए कहा कि बिना मोड़े ही वोट निकल आए. हालांकि, उपलब्ध बयान में इस आरोप के पीछे की पूरी प्रक्रिया या इससे जुड़े अन्य तथ्य स्पष्ट नहीं हैं.

 

अखिलेश ने मीडिया की चुनावी कवरेज पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि वोटों की गिनती शुरू होने से पहले ही मीडिया किसी पार्टी को जीता हुआ दिखाने लगता है. उनके मुताबिक, सुबह 8:30 बजे ही चुनाव परिणाम दिखाए जाने लगते हैं. उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि कुछ कैमरों में लाल रंग को भगवा दिखाया जाता है.

वोटर लिस्ट, आधार और EVM पर क्या बोले अखिलेश?

अखिलेश यादव ने सरकार और चुनाव आयोग से उन राज्यों में मतदाता सूची ठीक करने की अपील की, जहां चुनाव होने वाले हैं. उन्होंने आधार कार्ड से मतदाता पहचान को जोड़ने और बायोमेट्रिक प्रक्रिया के जरिए मतदान कराने का सुझाव दिया.

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर मतदाताओं की संख्या और मतदान व्यवस्था के साथ इस तरह का खेल किया जा रहा है, जिससे सपा समर्थक मतदाताओं को परेशानी हो. उनका दावा था कि जहां सपा के मतदाता ज्यादा हैं, वहां लंबी लाइनें लगवाई जा रही हैं, जबकि दूसरी तरफ मतदान तेजी से कराने के लिए दो EVM लगाई जा रही हैं.

अखिलेश ने चुनाव आयोग की ओर से कुछ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि आयोग निष्पक्षता के लिए कदम उठा रहा है, लेकिन आशंका जताई कि छोटी कार्रवाई के पीछे कोई बड़ा षड्यंत्र हो सकता है, जिसे समझना जरूरी है.

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