मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने गुरुवार को कहा कि केंद्र सरकार द्वारा आपदा राहत सहायता जारी करने के मानदंडों को संशोधित किया जाना चाहिए, क्योंकि पहाड़ी राज्यों की भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियां मैदानी इलाकों से अलग हैं।
मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए राज्य का दौरा करने वाले अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल के साथ एक बैठक के दौरान यह बयान दिया। टीम ने आज यहां मुख्यमंत्री से मुलाकात की।
उन्होंने कहा, “हिमाचल प्रदेश में जलवायु परिवर्तन का प्रभाव तेजी से स्पष्ट हो रहा है और राज्य में बादल फटने की बढ़ती घटनाओं को देखने के लिए एक वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता है।
सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश उत्तर भारत के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने और स्वच्छ हवा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने राज्य में राजमार्गों के विकास के दौरान और अधिक सुरंगों के निर्माण की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव एम रामचंद्रुडु के नेतृत्व में टीम ने प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए पिछले तीन दिनों में हिमाचल प्रदेश के आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया था।
इस अवसर पर मुख्य सचिव केके पंत, जल शक्ति मंत्रालय के निदेशक प्रकाश चंद, निदेशक कृषि एवं किसान कल्याण डॉ. सुभाष चंद्रा, ग्रामीण विकास मंत्रालय के निदेशक रामावतार मीणा, निदेशक सह विशेष सचिव आपदा प्रबंधन पुष्पेंद्र राणा सहित केंद्रीय टीम के अन्य सदस्य भी उपस्थित थे।

