हरियाणा में 657 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी के मामले में 2 गिरफ्तार, एक फरार और 5 रडार पर

हरियाणा के निलंबित आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार 657 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में आरोपी के रूप में नामित होने के बाद कथित तौर पर फरार चल रहे हैं। उनका मोबाइल फोन “स्विच-ऑफ” बना हुआ है।

सीबीआई ने इससे पहले इस मामले में 2000 और 2012 बैच के आईएएस अधिकारियों पंकज अग्रवाल और राम कुमार सिंह को गिरफ्तार किया था। दोनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।

2011 बैच के अधिकारी प्रदीप कुमार ने पंचकूला की एक अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। अदालत ने शुक्रवार को सीबीआई के वरिष्ठ लोक अभियोजक को निर्देश दिया कि वह सुनवाई की अगली तारीख 2 जुलाई को उसके समक्ष आरोपियों की किसी अन्य लंबित जमानत याचिका का विवरण पेश करें।

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के अधिकारियों ने कथित तौर पर आईएएस अधिकारियों सहित हरियाणा सरकार के कर्मचारियों के साथ मिलकर आठ राज्य और दो चंडीगढ़ प्रशासन विभागों से धन की हेराफेरी की।

सीबीआई के सूत्रों ने कहा कि प्रदीप कुमार गुरुग्राम स्थित अपने घर से ‘गायब’ थे, जबकि उनका फोन ‘स्वीच-ऑफ’ था। वह 31 अगस्त, 2022 से 10 दिसंबर, 2025 तक हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) के सदस्य सचिव के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान आईडीएफसी बैंक में खोले गए एक खाते से कथित तौर पर 169 करोड़ रुपये के गबन के लिए वांछित है।

सीबीआई ने 23 जून को एचएसपीसीबी में डेटा एंट्री ऑपरेटर सौरव शर्मा को गिरफ्तार किया था। उन पर नियमों का उल्लंघन कर निजी बैंकों में निवेश की सुविधा प्रदान करने का आरोप था, जिससे एचएसपीसीबी को 169.36 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। कथित तौर पर इस फंड को शेल फर्मों को डायवर्ट किया गया था। स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स को 70 करोड़ रुपये और कैपसीपी फिनटेक सर्विसेज को 53 करोड़ रुपये से अधिक की राशि भेजी गई। अन्य मुखौटा कंपनियों में दिशा ट्रेडर्स, मन्नत कॉन्ट्रैक्टर, एसआरआर प्लानिंग गुरुज प्राइवेट लिमिटेड और विटामेड सॉल्यूशंस शामिल हैं।

प्रदीप कुमार को हरियाणा सिविल सेवा से आईएएस के रूप में पदोन्नत किया गया था। उन्होंने 1999 में करनाल में सिटी मजिस्ट्रेट के रूप में अपना करियर शुरू किया था। उन्हें 8 अप्रैल को राम कुमार के साथ निलंबित कर दिया गया था।

बैंक घोटाले में आठ आईएएस अधिकारी जांच के दायरे में हैं। इनमें से दो को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि एक फरार है। बाकी पांच साकेत कुमार, विनीत गर्ग, मोहम्मद शायिन, मणि राम शर्मा और डीके बेहरा भी गिरफ्तारी का सामना कर रहे हैं।

राज्य सरकार ने इससे पहले सीबीआई को भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 17 ए के तहत आठ अधिकारियों की जांच करने की अनुमति दी थी। गर्ग ने एचएसपीसीबी के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया था और प्रदीप कुमार के वरिष्ठ थे।

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