बहादुरगढ़ के एसीपी द्वारा की गई जांच में झज्जर में हथियार लाइसेंस प्राप्त करने के लिए नकली आग्नेयास्त्र सुरक्षा प्रशिक्षण प्रमाण पत्र के उपयोग का पता चला है। जांच के बाद पुलिस ने हरियाणा पुलिस के दो सहायक उपनिरीक्षकों (एएसआई) सहित 12 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है और आरोपियों को जारी किए गए शस्त्र लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश की है।
एएसआई में से एक विनोद को निलंबित कर दिया गया है, जबकि अन्य पुलिस अधिकारी की भूमिका जांच के दायरे में है। विनोद के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।
गौरतलब है कि जांच रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस प्रशिक्षण केंद्र (पीटीसी), सुनारिया कलां (रोहतक), पुलिस लाइंस, हिसार और भर्ती प्रशिक्षण केंद्र, भोंडसी (गुरुग्राम) के नाम से फर्जी प्रमाण पत्र तैयार किए गए थे।
आरोपी झज्जर जिले के बाढ़सा, झज्जर सिटी, बहादुरगढ़, तालाव, लोवा कलां, दीघल, कबलाना और सिलोठी गांव के रहने वाले हैं। दोनों पुलिसकर्मी झज्जर पुलिस की आर्म्स लाइसेंस शाखा में तैनात थे।
सूत्रों ने बताया कि झज्जर के पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय) ने 20 मई को बहादुरगढ़ के एसीपी को जांच सौंपी थी।
उन्होंने कहा, ‘नियमों के अनुसार, हथियार लाइसेंस चाहने वाले आवेदकों को आग्नेयास्त्र सुरक्षा प्रशिक्षण प्रमाण पत्र जमा करना अनिवार्य है। प्रशिक्षण में आग्नेयास्त्रों की सुरक्षित हैंडलिंग, ले जाने, भंडारण और परिवहन, बुनियादी फायरिंग तकनीक, हथियारों और गोला-बारूद का रखरखाव और शस्त्र अधिनियम और नियमों के प्रावधान शामिल हैं। एक अधिकृत प्रशिक्षक से प्रशिक्षण के सफल समापन के बाद प्रमाण पत्र जारी किया जाता है।
सूत्रों ने कहा कि जांच के दौरान, एसीपी ने पाया कि तीनों प्रशिक्षण केंद्रों में से किसी ने भी संबंधित प्रमाण पत्र जारी नहीं किया था।
उन्होंने कहा, ‘जांच के दौरान दो आरोपी पेश नहीं हुए, जबकि दूसरे ने अपना बयान दर्ज नहीं कराया। यह पाया गया कि शस्त्र लाइसेंस शाखा शस्त्र लाइसेंस प्राप्त करने के लिए पोर्टल पर आवेदकों द्वारा अपलोड किए गए दस्तावेजों की जांच करती है। झज्जर कमिश्नरेट की स्थापना के बाद से ही इस प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है। जांच पूरी करते हुए एसीपी ने पाया कि आरोपी ने हथियार लाइसेंस हासिल करने के लिए फर्जी प्रशिक्षण प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया था।
सूत्रों ने आगे कहा कि रैकेट में कथित रूप से शामिल अन्य व्यक्तियों की भूमिका का भी पता लगाया जा रहा है। जांच अब उन लोगों की पहचान करने पर ध्यान केंद्रित करेगी जिन्होंने फर्जी प्रमाण पत्र तैयार किए थे और उनके स्रोत का पता लगाया था।
पुलिस आयुक्त सिमरदीप सिंह ने एएसआई विनोद के निलंबन की पुष्टि की और कहा कि उनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि इस मामले में शामिल पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

