सिंगापुर के एक पूर्व शीर्ष राजनयिक ने पाकिस्तान की तीखी आलोचना करते हुए उसे एक ऐसा देश करार दिया है जो विफलता के कगार पर खड़ा है। 2010 से 2013 तक सिंगापुर के विदेश मंत्रालय के स्थायी सचिव रहे बिलाहरी कौसिकन ने पाकिस्तानी राजनेताओं और सेना को देश की बदहाली का मुख्य कारण बताया है।
अपनी बात को साबित करने के लिए उन्होंने 1991 में सिंगापुर एयरलाइंस के विमान अपहरण की घटना और पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो से जुड़ा एक चौंकाने वाला किस्सा भी साझा किया।
एक वैश्विक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कौसिकन ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया कि पाकिस्तान की समस्याओं का मुख्य कारण भारत और अफगानिस्तान के साथ उसकी सीमाएं हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आप हर चीज के लिए अपनी भौगोलिक स्थिति को दोष नहीं दे सकते। यह सिर्फ एक बहाना है।
मैडम सो रही हैं, परेशान नहीं किया जा सकता
कौसिकन ने 26 मार्च 1991 को हुए सिंगापुर एयरलाइंस के विमान के अपहरण को याद किया। कुआलालंपुर से उड़ान भरने के तुरंत बाद चार पाकिस्तानी आतंकवादियों ने इसे हाईजैक कर लिया था और विमान सिंगापुर के चांगी एयरपोर्ट पर उतरा था। उस समय विमान में 114 यात्री और 11 क्रू मेंबर्स मौजूद थे।
उस वक्त कौसिकन सिंगापुर की विदेश सेवा में कार्यरत थे और उन्हें अपहरणकर्ताओं से बातचीत का जिम्मा सौंपा गया था। अपहरणकर्ताओं की मांग स्पष्ट नहीं थी, बस वे बेनजीर भुट्टो से बात करना चाहते थे, जो उस समय सत्ता से बाहर थीं।
कौसिकन ने बताया कि काफी मशक्कत के बाद जब रात करीब 3 बजे भुट्टो के घर संपर्क हुआ, तो उन्हें ऐसा व्यक्ति मिला जो उर्दू के अलावा अंग्रेजी बोल सकता था। जब उस व्यक्ति को पूरी गंभीर स्थिति समझाई गई, तो उसका जवाब था मैडम सो रही हैं और उन्हें परेशान नहीं किया जा सकता। इसके अगले ही पल उसने फोन काट दिया।
बातचीत विफल होने के बाद सिंगापुर के कमांडो ने विमान में घुसकर सभी आतंकवादियों को मार गिराया और यात्रियों को सुरक्षित बचा लिया। पूर्व राजनयिक के मुताबिक, यह घटना दिखाती है कि पाकिस्तानी समाज कितना सामंती है।
क्या है कुप्रबंधन के कारण?
कौसिकन ने पाकिस्तानी नेताओं को समय की बर्बादी करार दिया, वर्तमान में नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट के चेयरमैन हैं। उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही पाकिस्तान का भयानक रूप से कुप्रबंधन किया गया है। इसके राजनेता समय की बर्बादी हैं चाहे वे किसी भी पार्टी के हों और सेना भी इस समस्या का बहुत बड़ा हिस्सा है।
उन्होंने पाकिस्तान को एक स्थिर देश मानने के भ्रम को तोड़ते हुए उसकी आंतरिक अस्थिरता, कट्टरपंथ और आर्थिक कमजोरियों को उजागर किया। उन्होंने आगाह किया कि चरमपंथी और जिहादी समूहों को काबू में न कर पाने की वजह से ही पाकिस्तान आज ऐसी स्थिति में है।

