सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत दायर एक आवेदन के जवाब में स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा प्रदान किए गए आंकड़ों के अनुसार, बठिंडा जिले में 2019 और अप्रैल 2026 के बीच मानव इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस (एचआईवी) के 10,100 मामले दर्ज किए गए।
जिले में एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की संख्या 2019 में 1,130, 2020 में 1,003, 2021 में 1,079, 2022 में 1,775, 2023 में 1,820, 2024 में 1,460, 2025 में 1,358 और अप्रैल 2026 तक 475 मामले थे।
सामाजिक अधिकार कार्यकर्ता सोनू माहेश्वरी ने कहा कि उनका एनजीओ नौजवान वेलफेयर सोसाइटी नशीली दवाओं पर निर्भर व्यक्तियों के साथ काम कर रहा था और अस्पतालों में उनके इलाज की सुविधा प्रदान कर रहा था। उन्होंने कहा, ”सामान्य सीरिंज का उपयोग करने वाली अंतःशिरा दवा के सेवन और कई लोगों द्वारा सुइयों के पुन: उपयोग के कारण एचआईवी पॉजिटिव व्यक्तियों की संख्या बढ़ रही है।
माहेश्वरी ने कहा कि जिले में युवाओं में नशे की लत एक गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। उन्होंने कहा, ‘शायद ही कोई दिन ऐसा होता है जब कोई नया वीडियो न हो जिसमें युवाओं को नशे की लत में दिखाया गया हो।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. उषा गोयल ने कहा कि ये आंकड़े एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) सेंटर द्वारा संकलित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि उच्च संख्या को बढ़ी हुई स्क्रीनिंग से जोड़ा गया था।
जिले के आउट पेशेंट ओपिओइड असिस्टेड ट्रीटमेंट (ओओएटी) क्लीनिक में पंजीकृत सभी लोगों की स्क्रीनिंग की गई। ओओएटी केंद्रों में संक्रमित पाए जाने वालों में से 60 प्रतिशत से अधिक नशीली दवाओं का सेवन करने वाले हैं।
