राज्य भर से लगभग 2,500 आयुष्मान आरोग्य मंदिर (पूर्व में आयुष्मान भारत स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र) सोमवार को बंद रहे, क्योंकि उनके सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) सरकारी नीतियों के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए।
नोवेल इंटीग्रेटेड एसोसिएशन ऑफ कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स (नाइको), पंजाब के स्टेट कैशियर डॉ. शिवराज सिंह ने कहा कि राज्य के सीएचओ पिछले कई वर्षों से स्वास्थ्य विभाग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत पूरे समर्पण के साथ अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और टीबी, एनसीडी और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को सफल बनाने में सीएचओ का महत्वपूर्ण योगदान है।
डॉ. शिवराज ने कहा, “हमारी मुख्य मांगों में एनएचएम कर्मचारियों के लिए ‘समान काम, समान मजदूरी’ लागू करना, लॉयल्टी बोनस की बहाली, नए जारी किए गए प्रोत्साहन प्रदर्शन को तत्काल वापस लेना, सीएचओ के पदों और कैडर का विभाजन, वेतन और प्रोत्साहन का विलय और बीएएमएस योग्यता के साथ सीएचओ पर लगाए गए निजी प्रैक्टिस पर प्रतिबंध को हटाना शामिल है।
उन्होंने कहा कि सरकार और विभाग की लगातार उपेक्षा के कारण पंजाब के सभी सीएचओ संघर्ष का रास्ता अपनाने को मजबूर हो गए हैं। तदनुसार, सभी सीएचओ ने 22 जून से काम बंद कर दिया है और जब तक हमारी मांगों का जवाब नहीं मिल जाता, हम अपनी हड़ताल जारी रखेंगे।

