उच्चतम न्यायालय ने 2013 में नाबालिग के साथ बलात्कार के मामले में आसाराम की दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखने वाले राज्य उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली स्वयंभू बाबा आसाराम की याचिका पर मंगलवार को राजस्थान सरकार से जवाब मांगा।
न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया और दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा।
पीठ ने कहा, ‘हम अभी जमानत नहीं दे रहे हैं। राज्य की सुनवाई के अधीन हम इस बात पर विचार करेंगे कि क्या जमानत देने की गंभीर आवश्यकता है, जिस स्थिति में उनकी जान को खतरा है।
राजस्थान उच्च न्यायालय ने 27 मई को मामले में आसाराम की दोषसिद्धि को बरकरार रखा था, लेकिन उन्हें आईपीसी और पॉक्सो अधिनियम के तहत सामूहिक बलात्कार और एक बच्चे पर यौन उत्पीड़न से संबंधित आरोपों से बरी कर दिया था।
आसाराम को 25 अप्रैल, 2018 को अपने आश्रम में एक नाबालिग छात्रा का यौन उत्पीड़न करने का दोषी ठहराया गया था और उसे आईपीसी, पॉक्सो अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम के कई प्रावधानों के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।
