उत्तर प्रदेश के झांसी में कलेक्ट्रेट परिसर वकीलों के उग्र प्रदर्शन और हंगामे की वजह से रणक्षेत्र में तब्दील हो गया. शहर कोतवाल द्वारा एक अधिवक्ता के साथ कथित अभद्रता और एसएसपी स्तर पर सुनवाई न होने से आगबबूला वकीलों का हुजूम जिला अधिकारी कार्यालय परिसर में ज्ञापन सौंपने पहुंचा था. इसी दौरान प्रदर्शन का वीडियो बना रहे जेल चौकी प्रभारी को देखकर वकीलों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने दरोगा को दौड़ा-दौड़ाकर पीट दिया. साथ ही उनका मोबाइल फोन भी तोड़ डाला. दरोगा ने बमुश्किल भागकर अपनी जान बचाई. इस घटना के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और प्रशासन ने चार नामजद वकीलों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है, जिससे वकीलों और पुलिस के बीच तनाव और अधिक बढ़ गया है.
क्या है पूरा विवाद और वकीलों का आरोप?
जिला अधिवक्ता संघ के नेतृत्व में वकील कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन कर रहे थे. वकीलों का आरोप था कि उनके साथी अधिवक्ता और संयुक्त सचिव प्रकाशन रोमेश अग्रवाल किसी मुंशी की समस्या को लेकर थाना कोतवाली गए थे जहां शहर कोतवाल ने उनके साथ अभद्रता की और जेल भेजने की धमकी देकर भगा दिया.
4 वकीलों के खिलाफ FIR दर्ज
घटना के बाद नवाबाद थाने की पुलिस बल मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रित किया. पुलिस ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया है.

