अकाली दल वारिस पंजाब दे की पांच सदस्यीय प्रधान मसौदा समिति द्वारा पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को भंग करने पर आपत्ति जताए जाने के एक दिन बाद पार्टी नेतृत्व ने समिति के सदस्यों को कथित रूप से पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के लिए निलंबित कर दिया।
संयुक्त कार्यालय सचिव जतिंदर सिंह मेहता द्वारा जारी एक पत्र, जिसकी एक प्रति द ट्रिब्यून के पास है, में कहा गया है कि निम्नलिखित सदस्यों को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और अन्य जिम्मेदारियों से निलंबित कर दिया गया है: अवतार सिंह सेखो, गुरदीप सिंह बंदल, जगदीप सिंह कंसला, कृष्ण सिंह रूपना और जसविंदर सिंह ड्रोली।
समिति ने निलंबन को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है और संगठनात्मक ढांचे को भंग करने के फैसले का विरोध किया है, संयुक्त कार्यालय सचिव जतिंदर सिंह मेहता के इस कदम को मनमाना और उसकी सहमति के बिना लिया गया है।
समिति ने एक उच्च पद पर आसीन सरकारी कर्मचारी द्वारा पार्टी नियुक्तियों में कथित हस्तक्षेप, पार्टी पदाधिकारियों को नई इनोवा गाड़ियां उपलब्ध कराने और सरकारी निविदाओं और टिकट वितरण में कथित धोखाधड़ी के संबंध में भी स्पष्टीकरण मांगा था।
समिति के अनुसार, जेल में बंद खडूर साहिब के सांसद अमृतपाल सिंह के पिता और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष तरसेम सिंह को 20 अक्टूबर को छह पन्नों का एक विस्तृत पत्र सौंपा गया था।
इसमें चार व्यक्तियों की कथित गतिविधियों और सरकार और भारतीय एजेंसियों के साथ उनके कथित संबंधों के बारे में गंभीर आपत्तियां थीं।
सूत्रों ने कहा कि विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के अधिक उदार और धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक दृष्टिकोण अपनाने के बाद मतभेद सामने आए हैं। पंथक विचारधारा का पालन करने वाले लोग इस कदम से सहज नहीं हैं।
पार्टी के एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि पार्टी ने उनकी जीत की क्षमता के आधार पर उपयुक्त उम्मीदवारों की पहचान करने के लिए एक सर्वेक्षण किया था, जिसके बाद विरोध सामने आया था।
यह भी निर्णय लिया गया कि उन उम्मीदवारों को टिकट दिया जाएगा जिनकी सार्वजनिक छवि अपेक्षाकृत साफ-सुथरी हो और नशीली दवाओं से संबंधित मामलों में कोई संलिप्तता न हो।
खड़ूर साहिब के सांसद अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह इस राजनीतिक समूह का नेतृत्व कर रहे हैं। चुनाव आयोग द्वारा राजनीतिक दल के रूप में इसके पंजीकरण पर आपत्ति जताए जाने के बाद इस समूह को पंजीकरण में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। चुनाव चिह्न आवंटित करने की प्रक्रिया भी रुकी हुई है।
यह मामला वर्तमान में दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित है, जिसने राज्य सरकार से जवाब मांगा है।
समिति ने यह भी कहा कि 27 अक्टूबर को पंज प्रधानी के सदस्यों तरसेम सिंह, अमरजीत सिंह, परमजीत सिंह जोहल, हरभजन सिंह तूर और सुखविंदर सिंह के साथ हुई एक लंबी बैठक के दौरान तथ्यों और सबूतों के साथ कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई.
