अयोध्या में राम मंदिर में मिले दान के कथित गबन की जांच का फोकस अब मंदिर से जुड़े निजी सुरक्षाकर्मियों की भूमिका की जांच के लिए किया गया है।
सूत्रों के अनुसार, लगभग 400 निजी सुरक्षाकर्मी जांच के दायरे में हैं और उनके कर्तव्यों, काम करने के तरीकों और गतिविधियों के रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
सूत्रों ने बताया कि निजी सुरक्षाकर्मियों को मंदिर परिसर के मुख्य प्रवेश और निकास मार्गों, दर्शन पथ और प्रसाद ले जाने वाले मार्गों पर तैनात किया गया था।
उन्होंने बताया कि पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या प्रसाद की आवाजाही के दौरान नियमों का पालन किया गया या लोगों को बिना जरूरी जांच के छूट दी गई।
पुलिस ड्यूटी रोस्टर, सीसीटीवी फुटेज, एंट्री-एग्जिट रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों के बयानों की भी जांच कर रही है। वे इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि ड्यूटी के दौरान किस स्थान पर कौन सा गार्ड तैनात किया गया था और उस अवधि के दौरान कौन सी गतिविधियां हुईं।
सूत्रों ने कहा कि अगर यह पाया जाता है कि किसी भी सुरक्षाकर्मी ने जानबूझकर नियमों की अनदेखी की, अनुचित रूप से नरमी बरती या चोरी में सहायता की, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को चंदे के दुरुपयोग के आरोपों के बाद राम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था।
एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें अविनाश शुक्ला, विकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, राम शंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रमाशंकर उर्फ टीनू यादव शामिल हैं।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और इसके सदस्य अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है।

