शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने सोमवार को आम आदमी पार्टी (आप) पर आरोप लगाया कि वह नशीले पदार्थों की तस्करी के एक मामले में गिरफ्तार अपने कार्यकर्ता को जमानत दिलाने में मदद कर रही है।
उन्होंने कहा कि युद्ध नाशियां विरुध अभियान के एक वरिष्ठ पदाधिकारी लवप्रीत सिंह को सफलतापूर्वक जमानत मिल गई थी क्योंकि पंजाब पुलिस 4.5 किलोग्राम हेरोइन बरामदगी मामले में चालान पेश करने में विफल रही थी, जिसमें उन्हें छह महीने पहले गिरफ्तार किया गया था।
आप इन आरोपों से इनकार करते हुए दावा कर रही है कि कोट हृदय राम गांव के निवासी लवप्रीत सिंह को ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ के कारण जनवरी में पार्टी से ‘निलंबित’ कर दिया गया था।
पूरे मामले के बारे में बताते हुए मजीठिया ने कहा कि लवप्रीत को इस साल 18 मार्च को 8 किलोग्राम हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया गया था, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 80 करोड़ रुपये है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बरामदगी को घटाकर 4.5 किलोग्राम करने के लिए पुलिस पर भारी दबाव डाला गया, जिसके बाद लवप्रीत की जेल से रिहाई सुनिश्चित करने के प्रयास किए गए। सबसे पहले लवप्रीत को गिरफ्तार करने वाले एसएचओ का तबादला किया गया। इसके बाद, मामले में चालान पेश करने में जानबूझकर देरी के कारण लवप्रीत सिंह को जमानत मिल गई।
उन्होंने लवप्रीत को जमानत दिलाने में मदद करने वाली परिस्थितियों की एक स्वतंत्र एजेंसी से गहन जांच कराने की मांग की।
शिअद नेता ने आरोप लगाया कि पंजाब पुलिस ने चालान दाखिल करने के लिए 180 दिन की अवधि समाप्त होने से महज तीन दिन पहले जानबूझकर विस्तार मांगा।
उन्होंने कहा, ‘चूंकि ये तीन दिन छुट्टियों के दौरान पड़े हैं, इसलिए विस्तार नहीं दिया जा सका और लवप्रीत को जमानत मिल गई।
उन्होंने यह भी खुलासा किया कि जब अदालत ने अपने सुस्त रवैये के बारे में सवाल किया, तो अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि मामले में लंबित एफएसएल रिपोर्ट के कारण देरी हुई। उन्होंने कहा, ‘संयोग से, एफएसएल भी गृह मंत्री के अधीन है।
मजीठिया ने कहा कि लवप्रीत के खिलाफ मामले जैसे कि ‘वाटर-टाइट केस’ को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने सरकार पर कथित तौर पर नशीले पदार्थों के तस्करों को पनाह देने का आरोप लगाया, जो दावा किया कि राज्य में बढ़ते नशीली दवाओं के खतरे में योगदान दे रहा है।
हालांकि, एसएसपी (ग्रामीण) कंवलप्रीत सिंह चहल ने मजीठिया द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए उन्हें खारिज कर दिया।
उन्होंने कहा कि आरोपी को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय से जमानत मिल गई है और दोषी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
