2 पंडित, पत्नी और बेटे की हत्या करने वाले अरविंद सिंह की दो बेटियों को SSP आजमगढ़ अनिल कुमार लेंगे गोद

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के शंभूपुर गांव में हुआ खौफनाक हत्याकांड लगातार सुर्खियों में बना हुआ है. बीते सोमवार को एक परिवार में भाई की आत्मा की शांति के लिए किए जा रहे पूजा के दौरान ऐसा विवाद खड़ा हुआ कि एक पूरा परिवार ही उजड़ गया.  घर के सदस्य अरविंद सिंह ने पूजा के बीच अपनी पत्नी समेत दो पड़ितों की गोली मारकर हत्या कर दी. फिर उसने अपने तीन बच्चों को कमरे में बंद करके बंधक बना लिया.

इस दौरान कई घंटों तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बीच आरोपी अरविंद ने अपने 10 साल के बेटे को भी गोली मार दी. ऐसे में जवाबी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने अरविंद सिंह को एनकाउंटर में ढेर कर दिया. लेकिन अब पूरे परिवार में सिर्फ एक बूढ़ी मां और दो पोतियां बची हैं. ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल था कि इन मासूम बच्चियों की जिम्मेदारी कौन लेगा?

इस बीच आजमगढ़ के एसएसपी अनिल कुमार ने कुछ ऐसा किया हर किसी के लिए मिसाल बन गया. सिर से मां-बाप का साया उठ जाने के बाद अनाथ हुई दो मासूम बच्चियों का भविष्य अब अंधेरे में नहीं जाएगा. आजमगढ़ के एसएसपी अनिल कुमार ने दोनों बच्चियों को गोद लेने का बड़ा ऐलान किया है. SSP अपनी एक महीने की तनख्वाह बच्चियों के नाम एफडी कराएंगे. जबकि आजमगढ़ पुलिस का हर कर्मचारी अपने एक दिन का वेतन इन बच्चियों के भविष्य के लिए देगा. 

अनाथ बेटियों को SSP ने लिया गोद

शंभूपुर गांव में हुई दिल दहला देने वाली वारदात में गोलीबारी के दौरान दो पड़ित और आरोपी अरविंद की पत्नी की मौत हो गई थी. बाद में पुलिस की जवाबी कार्रवाई में आरोपी अरविंद भी मारा गया. इस त्रासदी के बाद घर में केवल उसकी बुजुर्ग मां और दो मासूम बेटियां ही बची हैं.

ऐसे में एसएसपी अनिल कुमार ने संवेदनशीलता दिखाते हुए कहा कि ‘इन बच्चियों के भविष्य के लिए मैं अनिल कुमार इन्हें गोद लेता हूं. मेरी एक महीने की सैलरी एफडी के तौर पर इनके नाम रहेगी और आजमगढ़ पुलिस का हर कर्मचारी अपनी एक दिन की सैलरी इन बच्चियों को देगा.’ दोनों बच्चियों को ‘मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना’ के तहत ढाई-ढाई हजार रुपये प्रतिमाह की सरकारी वित्तीय सहायता भी दिलाई जाएगी.

11 साल की बड़ी बच्ची इस खौफनाक मंजर की प्रत्यक्षदर्शी रही है. उसके मन पर पड़े गहरे मनोवैज्ञानिक आघात को देखते हुए पुलिस ने किसी  चाइल्ड साइकेट्रिस्ट से उसकी काउंसलिंग कराने की व्यवस्था की है.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलासा

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान आरोपी के बेटे की मौत को लेकर यह सवाल उठ रहा था कि गोली किसकी थी. पुलिस ने डॉक्टरों के पैनल द्वारा की गई पोस्टमार्टम रिपोर्ट, वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी के आधार पर स्थिति साफ की है.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चे के शरीर में मिले एंट्री वूंड (घाव) का आकार .32 बोर के असलहे से मेल खाता है. एसएसपी के अनुसार मुठभेड़ में शामिल पुलिस टीम के पास 9mm के हथियार थे. जबकि आरोपी अरविंद के पास .32 बोर का लाइसेंसी रिवॉल्वर था. बुलेट की ट्रैजेक्ट्री और घाव की स्थिति से साफ है कि अरविंद ने बेटे को बेहद करीब से गोली मारी थी. जब पुलिस कमरे में दाखिल हुई, तब वह कमरे के दूसरे हिस्से में थी. यानी बच्चे को गोली आरोपी पिता ने ही मारी थी, पुलिस की गोली से उसकी मौत नहीं हुई.

ATS की एंट्री और खौफनाक एनकाउंटर

घटना की रात पुलिस ने करीब 7 से 8 घंटे तक आरोपी अरविंद से बातचीत कर उसे सरेंडर कराने की कोशिश की थी. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए यूपी एटीएस (ATS) की टीम को भी मौके पर बुलाया गया था. अचानक कमरे के अंदर से गोली चलने की आवाज आई जहां अरविंद ने अपने बेटे को गोली मार दी थी और बाकी बच्चों को भी मारने की धमकी दे रहा था. एसएसपी ने बताया कि अगर पुलिस एक सेकंड भी गंवाती तो वह बाकी बच्चों को भी मार देता. इसी डर से पुलिस ने तुरंत दरवाजा तोड़ा.

जवाबी कार्रवाई में मारा गया आरोपी

कमरे में दाखिल होते ही आरोपी ने पुलिस टीम पर भी फायरिंग शुरू कर दी. पुलिस की जवाबी कार्रवाई में अरविंद ढेर हो गया जिसके बाद दो मासूम बच्चियों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका. आरोपी के पास से .32 बोर की रिवॉल्वर और 18 जिंदा कारतूस मिले. यह हथियार वर्ष 2007 में उसके मृत भाई के नाम पर जारी हुआ था जो बाद में वारिसान के आधार पर अरविंद को ट्रांसफर हुआ था.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

2