मानसून सत्र की शुरुआत में ‘वंदे मातरम’ नहीं सुनाए जाने को लेकर विवाद आज लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा और इस मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा के बीच आमने-सामने की आवाज उठी जिसके कारण अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही 24 अगस्त तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।
विपक्ष के नेता जय राम ठाकुर द्वारा आज प्रश्नकाल के तुरंत बाद यह मुद्दा उठाए जाने के बाद सदन में हंगामा देखने को मिला और सत्ता पक्ष और विपक्षी विधायकों ने इस मुद्दे पर नारेबाजी की। दोनों पक्षों के नारेबाजी में जुटी होने पर विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप पठानिया ने सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
बाद में जब भोजनावकाश के बाद सदन की कार्यवाही फिर शुरू हुई तो मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दोहराया कि भाजपा ने कल विधानसभा में राष्ट्रगान का अपमान किया था। गुस्साए विपक्ष ने फिर से नारेबाजी का सहारा लिया, जिसका सत्ता पक्ष ने विरोध किया।
इसके बाद दोनों पक्षों ने नारेबाजी के साथ पूरी तरह से हंगामा किया। अध्यक्ष द्वारा व्यवस्था बहाल करने की बार-बार की गई दलीलें विफल हो गईं, जिसके कारण उन्हें सदन की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।
भाजपा विधायकों द्वारा कल राष्ट्रगान के अपमान के आरोपों को खारिज करते हुए विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने विधानसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया कि सच्चाई का पता लगाने के लिए कल विधानसभा में राष्ट्रगान बजने का वीडियो चलाया जाए। उन्होंने कहा, ‘यह गलत धारणा बनाने की कोशिश की जा रही है कि भाजपा ने राष्ट्रगान का अपमान किया है। मुख्यमंत्री को अपनी भ्रामक टिप्पणियों के लिए सदन के अंदर और बाहर दोनों जगह माफी मांगनी चाहिए।
विपक्ष के नेता के जवाब में सुक्खू ने कहा कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत देश के गीत हैं न कि किसी खास पार्टी, क्षेत्र या समुदाय के। उन्होंने कहा, ‘विपक्ष राष्ट्रगान का अपमान करने का दोषी है। वे तिरंगे का सम्मान भी नहीं करते क्योंकि उन्होंने राजस्व मंत्री के वाहन पर जूते फेंके थे, जिस पर राष्ट्रीय ध्वज था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस नेताओं ने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सुक्खू ने कहा, ‘भाजपा केवल नौटंकी में लिप्त है और राष्ट्रगीत और गान के मुद्दे का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रही है।

