मंडी जिले की कसोग तहसील के ग्राम पंचायत बिंदला के अंतर्गत आने वाले चिंताला ब्लावग गांव के स्कूली छात्रों को पनबिजली परियोजना बांध के बढ़ते जलस्तर के कारण हर दिन अपने स्कूल पहुंचने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कोई उचित पुल या सड़क संपर्क नहीं होने के कारण, बच्चों को पुराने जमाने के झूले (झूला) का उपयोग करके पानी पार करने के लिए मजबूर किया जाता है, जिससे उनकी सुरक्षा के बारे में गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं।
दशकों पुराना झूला खराब स्थिति में है और एक महत्वपूर्ण जोखिम पैदा करता है, खासकर स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए जो अपने दैनिक आवागमन के लिए इस पर निर्भर हैं। ट्रिब्यून फोटो।
गांव के निवासियों का कहना है कि बांध के पार बच्चों को ले जाना एक दैनिक चुनौती बन गया है। ट्रिब्यून फोटो।
गांव के निवासियों का कहना है कि बांध के पार बच्चों को ले जाना एक दैनिक चुनौती बन गया है। उनका आरोप है कि दशकों पुराना झूला खराब स्थिति में है और एक महत्वपूर्ण जोखिम पैदा करता है, खासकर स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए जो अपने दैनिक आवागमन के लिए इस पर निर्भर हैं।
चिंताला ब्लावग गांव के निवासी बोध राज ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो शेयर कर इस मुद्दे को उजागर किया। उन्होंने स्थिति को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा कि झूले के पार हर यात्रा बच्चों के लिए जोखिम भरा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों ने बार-बार संबंधित मंत्री और स्थानीय विधायक से झूले को सुरक्षित विकल्प के साथ बदलने या अपग्रेड करने की अपील की है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
निवासियों के अनुसार, यह समस्या एक पनबिजली परियोजना के निर्माण के बाद उत्पन्न हुई, जिसके कारण बांध के जल स्तर में वृद्धि के कारण पारंपरिक पहुंच मार्ग जलमग्न हो गए। उन्होंने हिमाचल प्रदेश सरकार से इस मुद्दे पर तत्काल ध्यान देने और स्कूली बच्चों और अन्य निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक सुरक्षित और स्थायी परिवहन सुविधा प्रदान करने का आग्रह किया है, जो अपनी दैनिक यात्रा के लिए मार्ग पर निर्भर हैं।

