अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को अवैध प्रवासियों को हिरासत में रखने के मामले में बड़ा झटका लगा है। एक अपीलीय अदालत ने गुरुवार को ट्रंप प्रशासन की उस शक्ति पर रोक लगा दी, जिसके तहत उन हजारों प्रवासियों को अनिवार्य रूप से हिरासत में रखा जा सकता है, जिनके निर्वासन की प्रक्रिया लंबित है।
अदालत ने कहा कि ऐसे लोगों को 90 दिनों से ज्यादा समय तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता। इसके बाद उन्हें बांड पर रिहाई के लिए सुनवाई का अवसर देना जरूरी है।
न्यू ओरलियंस स्थित पांचवें यूएस सर्किट कोर्ट आफ अपील्स की तीन जजों की पीठ ने 2-1 से यह फैसला सुनाया। यह फैसला उन हजारों लोगों पर असर डाल सकता है, जिन्हें राष्ट्रपति ट्रंप की सख्त आव्रजन कार्रवाई के तहत टेक्सास और लुइसियाना जैसे राज्यों में अमेरिकी इमिग्रेशन एंड कस्टम इनफोर्समेंट ने हिरासत में लिया है।
हालांकि इसी अदालत की एक अन्य पीठ ने देश में सबसे पहले ट्रंप प्रशासन के उस नए नजरिये का समर्थन किया था, जिसके तहत अमेरिका में रहने वाले गैर-नागरिकों को अनिवार्य रूप से हिरासत में लिया जा सकता था।
लेकिन गत फरवरी के इस फैसले में यह नहीं बताया गया था कि अमेरिकी संविधान के पांचवें संशोधन के तहत यह जरूरी है कि उन प्रवासियों को भी आव्रजन जज के सामने सुनवाई के जरिये रिहाई का अवसर दिया जाए।
यूएस सर्किट कोर्ट की जज लेस्ली साउथविक ने गुरुवार को फैसले में कहा कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 2001 में यह स्पष्ट किया था कि यह प्रविधान सभी को सुरक्षा प्रदान करता है।
पांच दिन में दस हजार गिरफ्तार
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्वासन अभियान में पिछले कुछ दिनों में तेजी देखी जा रही है। अमेरिकी इमिग्रेशन एंड कस्टम इनफोर्समेंट (आइसीई) ने जून के अंतिम पांच दिनों में करीब दस हजार लोगों को गिरफ्तार किया। यह ट्रंप के निर्वासन एजेंडे को लागू करने के लिए जिम्मेदार एजेंसी के अभियान में बड़ी तेजी का संकेत है।
इस मामले की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने बताया कि शुक्रवार से मंगलवार तक पांच दिन के अभियान में रोजाना औसतन करीब दो हजार गिरफ्तारी हुई। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि ये गिरफ्तारियां कहां की गईं।
(समाचार एजेंसी रॉयटर्स के इनपुट के साथ)

